Forever
Forever खोलें
Forever की चिट्ठियाँ

याद आप बनाइए। पहुँचाना हम पर छोड़िए।

आज लिखिए। हम उसे सँभालकर रखेंगे और ठीक उसी दिन सही इंसान तक पहुँचाएँगे जो आप चुनें — कल, उनके जन्मदिन पर, या आज से कई साल बाद की किसी सुबह।

अपनी पहली चिट्ठी लिखेंहम नए हैं, इसलिए अभी मुफ़्त।

जब मैंने यह लिखी थी,

तुम चार दिन की थीं।

पापा की ओर से18 साल पहले भेजी गई

मैं कोई भाषण नहीं दे रही।

उसकी जगह यह लिखा था,

बहुत साल पहले।

माँ की ओर सेतुम्हारी शादी के दिन भेजी गई

जब तुम यह पढ़ोगे,

तब तक मैं वह कहानी बन चुका

हूँगा जो कोई तुम्हें सुनाता है।

दादाजी की ओर से6 साल पहले भेजी गई
एक अलग तरह की निशानी

सोचिए, आपने क्या-क्या सँभाल रखा है।

दराज़ में रखा एक कार्ड। किताब के भीतर दबी एक पर्ची। एक चिट्ठी जिसे आपने एक से ज़्यादा बार पढ़ा है। इनमें से कोई भी मैसेज नहीं था।

किसी दिन कोई आपकी लिखी किसी चीज़ को इसी तरह सँभालकर रखेगा।

जन्मदिन मुबारक!! 🎉🎉पहुँच गया · 09:14 पर देखा

इक्कीस के हुए। यह मैंने उस

हफ़्ते लिखी थी जब तुमने

साइकिल चलाना सीखा था।

तब बहुत बुरा हाल था।

पिताजी की ओर से11 साल पहले लिखी गई
आसान हिस्सा

तीन काम, फिर बात आपके हाथ से निकल जाती है।

एक बेहतर कल के नाम एक चिट्ठी।

  1. इसे ढंग से लिखिए

    यह चिट्ठी जैसी लगनी चाहिए, मैसेज जैसी नहीं। काग़ज़ और लिखावट चुनिए, कुछ स्टिकर बिखेरिए, और वे तस्वीरें साथ भेजिए जो आप हमेशा से भेजना चाहते थे।

  2. दिन चुनिए

    कल सुबह। उनका साठवाँ जन्मदिन। वह हफ़्ता जब वे घर छोड़ेंगे। भेजे जाने तक आप अपना इरादा बदल सकते हैं।

  3. फिर इसे छोड़ दीजिए

    आपके चुने हुए दिन यह बस उनके सामने होगी। वे इसे पढ़ेंगे, और जवाब भी लिख सकेंगे।

हमारा वादा

आपकी चिट्ठी के साथ हम क्या करते हैं।

सबसे मुश्किल हिस्सा है कह पाना। एक बार कह दिया, तो चिट्ठी हमारी ज़िम्मेदारी है — पूरी सँभली हुई, इंतज़ार करती हुई, और उसी सुबह उन तक पहुँचती हुई जो आपने चुनी थी, एक दिन पहले नहीं।

दस साल किसी चिट्ठी के इंतज़ार के लिए बहुत लंबा वक़्त नहीं है।

  • भेजते ही बंद लिफ़ाफ़ा

    उन्हें कुछ भी पहले नहीं दिखता, और आपकी चिट्ठी कहीं सार्वजनिक नहीं होती।

  • सही इंसान, सही दिन

    आपके चुने दिन, आपके अपने समय के हिसाब से उनके इनबॉक्स में — “कभी उन्हीं दिनों” नहीं।

  • जाने तक आपकी अपनी

    पहुँचने से पहले कभी भी दिन, शब्द या तस्वीरें बदल दीजिए।

अपने अठारहवें जन्मदिन पर वह वह चिट्ठी खोलेगी जो आपने उसके जन्म के हफ़्ते लिखी थी।

तब तक आप इसे लिखना आधा भूल चुके होंगे। वह इसे पढ़ना कभी नहीं भूलेगी।

सवाल

लिखने से पहले

Forever क्या है?

Forever वह जगह है जहाँ आप आज एक असली चिट्ठी लिखते हैं और वह उस दिन पहुँचती है जो आप चुनें — कल, किसी जन्मदिन पर, या आज से अठारह साल बाद की किसी सुबह। लिखते आप हैं, सँभालते हम हैं, और वह ठीक उसी दिन उन तक पहुँचती है।

कितने आगे तक की तारीख़ चुनी जा सकती है?

साठ साल तक। दिन, महीना और साल चुनिए — चिट्ठी ठीक उसी सुबह का इंतज़ार करेगी।

भेजने के बाद दिन बदला जा सकता है?

हाँ। पहुँचने से पहले कभी भी। चिट्ठी Letters में मिलेगी, वहीं से दिन बदल दीजिए।

क्या पाने वाले का खाता होना ज़रूरी है?

नहीं। चिट्ठी ईमेल से पहुँचती है और उनके ब्राउज़र में खुल जाती है, तस्वीरों समेत। खाता तभी चाहिए जब वे जवाब लिखना चाहें।

क्या तस्वीरें और वीडियो जोड़ सकते हैं?

हाँ। तस्वीरें और स्टिकर आप खुद पन्ने पर रखते हैं, जैसे लिफ़ाफ़े में तस्वीर रखी जाती है, और एक छोटा वीडियो भी साथ भेजा जा सकता है।

मेरी चिट्ठी कौन पढ़ सकता है?

आप और वह इंसान जिसे आपने लिखी है। चिट्ठियाँ न कहीं प्रकाशित होती हैं, न सर्च इंजन में आती हैं, न किसी और को दिखाई जाती हैं।

क्या कोई शुल्क है?

नहीं। हम नए हैं, इसलिए अभी सब मुफ़्त है — लिखना, तस्वीरें, वीडियो और चुने हुए दिन पर पहुँचाना।

Forever किन भाषाओं में है?

अंग्रेज़ी, हिन्दी, स्पेनिश, फ़्रेंच, जर्मन और चीनी। चिट्ठी आप किसी भी भाषा में लिख सकते हैं।

एक नाम से शुरुआत

आज किसकी याद आ रही है?

उनका पता लिखिए, और वह बात कह दीजिए जो आप कहना चाहते थे।